जंक फूड खाने के फायदे और नुकसान – Advantages and disadvantages of eating junk food in Hindi

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जंक फूड खाने के फायदे और नुकसान
जंक फूड खाने के फायदे और नुकसान

जंक फूड क्या होता है :- सभी जानते है की जंक फूड क्या होता है लेकिन बताना जरूरी है की जंक फूड के अंतर्गत कोल्डड्रिंक ,नमकीन ,चिप्स आदि और जो भी चिजे तेल मे तले-भुना रहते है वो भी जंक फूड मे ही आते है जैसे समोसा ,पिज्जा ,बर्गर और भी बहुत सारी चिजे है जो की जंक फूड के अंतर्गत आती है आपके जानकारी के लिए इतना बहुत है |

जंक फूड खाने से नुकसान :- Disadvantages of eating junk food in hindi

इसको खाने से बहुत सी बीमारी होती है यही इसका नुकसान है आइए बारी-बारी से देखते है | –

  1. मोटापे की समस्या :- आप देखेंगे की जो भी लोग जंक फूड का इस्तेमाल करते है उनमे फैट ज्यादा होता है अर्थात उनमे मोटापा होता है उनका पेट भी निकला रहता है ये इससे होने वाली सबसे मामूली सी समस्या है सभी जानते है की तेल वाली कोई भी चीज आपके शरीर को फायदा नही करती है और जंक फूड मे काफी फैट होता है इसलिए लोग मोटे हो जाते है और उनका पेट निकाल जाता है |
  2. कैंसर :- अभी कुछ दिनो पहले ही सुनने मे आया है की इसकी वजह से पेट का कैंसर हो गया था जंक फूड मे शुगर और फैट की मात्रा ज्यादा होने की वजह से ऐसा हुआ था ये इसकी सबसे बड़ी कमी है इसलिए सभी लोग को इस पर ध्याना देना होगा जिससे आप कैंसर से बच सके |
  3. दिल के रोग :- जब आप जंक फूड का इस्तेमाल करते है तो आपके शरीर मे कैलास्ट्रोल की मात्रा बढ़ जाती है जिससे आपके दिल पे बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता है और ज्यादा वजन की वजह से भी दिल के रोग हो जाते है और आप जानते भी होंगे की वजन ज्यादा होने की वजह से कई लोगो को हार्ट अटैक भी आया है |
  4. थकान :- जो भी लोग जंक फूड का इस्तेमाल करते है वो बहुत जल्दी ही थक जाते है क्यूकी जंक फूड मे कोई भी प्रोटीन नही मिलती है जो आपके शरीर को ताकत दे इसलिए आप बहुत जल्दी थक जाते है |
  5. तनाव :- जब लोग इसका प्रयोग करते है तो थकान होती है जिसकी वजह से लोग तनाव मे रहते है और शरीर मे प्रोटीन की कमी रहती है इसकी वजह से भी लोग तनाव मे रहते है |

जंक फूड खाने के फायदे :- Benefits of eating junk food in hindi

इसके कुछ फायदे भी है जो कुछ इस प्रकार है – जंक फूड आपको बहुत आसानी से मिल जाता है क्यूकी हर दूसरी गली मे इसकी दुकान मिल जाएगी जिस वजह से आपको ये बहुत आसानी से उपलब्ध हो जाता है |

जो विद्यार्थी बाहर रह के पढ़ते है उनको जंक फूड मिल जाने के वजह से उनका समय बच जाता है ये आपको बना-बनाया मिल जाता है इसलिए आपका कोई भी समय इसके लिए खराब नही करना पड़ता है और आपके पैसो की भी बचत हो जाती है |

कुछ महत्वपूर्ण बाते :- रही है और इसकी वजह से हमारा वातावरण दिन प्रति दिन दूषित होता जा रहा है जिसकी वजह से लोगो को बहुत समस्या हो रही है और खाने की मांग ज्यादा हो आज-कल खाने से लेकर बहुत बाते हो रही है क्यूकी इस समय आबादी भी बढ़ गयी है और हमारे किसान भी दिन प्रति दिन कम होते जा रहे है क्यूकी शिक्षा का स्तर बढ़ गया है तो किसान का लड़का किसान न बन कर इंजीनियर , डॉक्टर आदि बन रहा है जिससे खाने की सामाग्री प्राप्त नही हो पा रहा है और दिन प्रति दिन हम विकसती हो रहे है और नए-नए खोज कर रहे है | अब खाने की सामग्री कैसे प्राप्त करे इसपर विचार करे हमारे वैज्ञानिक अपने एक्सपरिमेंट से खाने वाली सामग्री की बढ़ोतरी कर रहे जिसमे केमिकल का इस्तेमाल हो रहा है जो हमरे स्वास्थ के लिए बहुत हानी कारक है और आज-कल के लोग तो सीधे-सीधे जंक फूड का इस्तेमाल कर रहे जो पूरी तरह से प्रकर्तिक नही है| इसी के बारे मे आज आर्टिकल लिखा गया है तो जो भी इस आर्टिकल को पढे वो इस आर्टिकल मे बताए गए बातो पे विचार करे और फायदे को बरीयता न दे कर उससे होने वाले नुकसान पर ज्यादा ध्यान दे क्यूकी यही आज के लोगो के लिए बीमारी का घर बना बैठा है और लोग खुद भी खा रहे है और अपने बच्चो को भी खिला रहे यही कारण की लोगो की उम्र अब कम हो गयी है इससे तरह-तरह की बीमारी हो जाती है | ये बड़ो का फर्ज बनाता है की वो इन इन बातो को माने और बच्चो को भी न करने दे |

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डॉ.शांति रॉय पटना: एक बांझ दंपति के लिए सबसे अच्छा सलाहकार

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डॉ.शांति रॉय पटना
डॉ.शांति रॉय पटना

कौन हैं डॉ। शांति राय?

डॉ शांति राय पटना में एक वरिष्ठ अनुभवी स्त्री रोग विशेषज्ञ हैं। डॉ.शांति रॉय अभी सबसे जानबूझकर परियोजना पर काम कर रही हैं जो कि एक बांझ दंपति के लिए वैकल्पिक उपाय खोजना है। जैसा कि पटना बिहार की राजधानी है, उसने पूरे बिहार के साथ-साथ अन्य राज्यों के भी बांझ जोड़े की ज़िम्मेदारी ली है।

डॉ। शांति रॉय ने सरोगेसी के साथ-साथ इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन उपचारों की पेशकश करके कई मामलों को हल किया है।

डॉ.शांति रॉय पटना consultation – सबसे किफायती और हर लोगों की जेब के लिए सूट

जैसा कि डॉ। शांति रॉय खुद एक महिला हैं, वे महिला स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दों को भी समझती हैं और महिलाओं के लिए इसका सकारात्मक पक्ष है, जिन्हें मासिक अवधि के मुद्दों का सामना करना पड़ता है, मुद्दों और जननांगों से संबंधित जननांग ऐसे मुद्दे हैं, जिनका खुलासा करने के लिए महिलाएं सहज नहीं हैं। । ऐसे मामले में, डॉ.शांति रॉय बहुत स्पष्ट और मिलनसार हैं और हर सलाहकार जो आपको उनके जैसा नहीं मिल सकता है।

डॉ शांति राय पटना में परामर्श की फीस पटना के अन्य स्त्री रोग विशेषज्ञों की तुलना में बहुत कम है। फिर भी, बिहार स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत पिछड़ा हुआ है और साथ ही गरीबी दर भी अच्छी है और यह एक नकारात्मक पक्ष है, इसलिए डॉ। शांति राय ने ऐसी महिलाओं या ऐसे जोड़ों के लिए न्यूनतम शुल्क प्रदान करने की योजना बनाई है।

पटना में डॉ। शांति रॉय क्लिनिक: शहर के मध्य में स्थित है

पटना में डॉ। शांति रॉय क्लिनिक शहर ब्रज वेशम में स्थित है। ब्रज वेशम एक ऐसा इलाका है, जिसमें बहुत पर्यावरण है। पटना में डॉ। शांति रॉय क्लिनिक पूरी तरह से उन्नत तकनीकों से सुसज्जित है जो रोगियों के निदान और उपचार के लिए सलाहकार की सहायता करती है।

डॉ.शांति रॉय book online appointment – पर्याप्त समय अवधि के साथ परामर्श प्रदान करता है

हाँ, आप उचित परामर्श प्राप्त कर सकते हैं यदि आपको ऑनलाइन नियुक्ति मिलेगी। वह आपके साथ अधिक समय बिताएगी और सही तरीके से निदान करेगी ताकि मामला उचित हो और इसके लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता हो। इसलिए ट्रैफिक से बचने के लिए ऑनलाइन अप्वाइंटमेंट लें।

डॉ.शांति रॉय को ऑनलाइन अपॉइंटमेंट मिलता है जो पटना से आने वाले मरीजों के लिए एक प्रभावी प्रक्रिया है।

शांति रॉय पटना Contact Number- सलाहकार के क्लीनिक और कार्यक्रम के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करने के लिए आपकी सहायता करें।

कॉन्टेक्ट नंबर बुनियादी जानकारी है जो हर मरीज की मांग है ताकि वे आसानी से संपर्क कर सकें अगर उन्हें इस बीच किसी भी मुद्दे का सामना करना पड़ेगा।

डॉ.शांति रॉय पटना reviews:

डॉ.शांति रॉय पटना एकल सलाहकार हैं जिन्होंने महिलाओं के साथ-साथ बांझ दंपत्ति के लिए ऐसी बेहतरीन सेवाओं की योजना बनाई है। एक बार पटना में एक दंपत्ति को 5 साल तक बच्चा नहीं हुआ और डॉ। शांति राय से सलाह के बाद उन्हें गर्भ धारण करने का मौका मिला। उसके द्वारा दिया गया उपचार बहुत फलदायी है।

डॉ। शांति रॉय पटना में मरीजों की समीक्षा बहुत ही ग्लैमरस है क्योंकि उन्होंने पूरी एकाग्रता के साथ हर मरीज से परामर्श करने की पूरी कोशिश की है। उन्हें पटना में सर्वश्रेष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ का पुरस्कार मिला है।

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सरोगेसी क्या है हिंदी में, जाने सरोगेसी का खर्च कितना होता है

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सरोगेसी क्या है हिंदी में
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नमस्कार दोस्तों यहां पर हम जानेंगे कि सरोगेसी क्या है और सरोगेसी का खर्च कितना होता है?

सरोगेसी क्या है – Surrogacy Kya Hai in Hindi

सरोगेसी, सहायक प्रजनन की एक विधि है जहां माता-पिता एक गर्भावस्था सरोगेट के साथ काम करते हैं जो जन्म तक उनके  बच्चे को अपने गर्भ में रखेगी और देखभाल करेंगे। जब पति और पत्नी अपने दम पर ऐसा नहीं कर सकते, तो उनके परिवार को शुरू करने या बढ़ने के लिए सरोगेसी का इस्तेमाल करते हैं।

सरोगेसी कैसे काम करती है? – Surrogacy Kese Kaam Karti hai

गेस्टेशनल सरोगेसी उन लोगों की मदद करती है जो बच्चे पैदा करने में असमर्थ होते हैं। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें चिकित्सा और कानूनी विशेषज्ञता की आवश्यकता होती है, साथ ही पूरे यात्रा में एक मजबूत समर्थन प्रक्रिया भी होती, जिसको सबकी जरुरत होती  है।

आईवीएफ के माध्यम से, भ्रूण एक प्रजनन क्लिनिक के एक प्रयोगशाला में बनाया जाता है। कभी-कभी इच्छित माता-पिता अपनी आनुवंशिक डीएनए (DNA) का उपयोग करते हैं। कभी-कभी, एक एग डोनर की आवश्यकता होती है। प्रजनन क्लिनिक में, 1-2 भ्रूण एक गर्भ लेने वाली महिला में स्थापित किया जाता हैं, जो शिशु को अपने गर्भ में धारण करती  हैं।

गेस्टेशनल कैरियर का उन बच्चों के लिए कोई आनुवंशिक संबंध नहीं है जो वे अपने गर्भ से पैदा करती हैं।

सरोगेसी कितने प्रकार की होती है – Surrogacy Kitne Types ki Hoti hai

यह दो प्रकार का होता हैं:

  • ट्रेडियशनल सरोगसी
  • गेस्टेशनल सरोगसी
सरोगेसी क्या है हिंदी में
सरोगेसी क्या है हिंदी में

ट्रेडिशनल सरोगेसी क्या है? – Traditional Surrogacy Kya hai in Hindi

एक पारंपरिक या ट्रेडिशनल सरोगेट बच्चे की जैविक मां होती है; उसका अंडा इच्छित पिता या दाता के शुक्राणु के साथ मिलाया जाता है। यह सरोगेसी का प्रकार है जिसे सबसे लंबे समय तक अभ्यास किया गया है। गर्भ के बाहर भ्रूण के निर्माण के लिए आधुनिक तकनीक की अनुमति देने से पहले, यह सरोगेट मां के माध्यम से गर्भ धारण करने का एकमात्र तरीका था।

ट्रेडिशनल सरोगेसी बहुत अधिक दुर्लभ है।

गेस्टेशनल सरोगेसी क्या है? – Gestational surrogacy kya hai in hindi

विज्ञान अब एक सरोगेट मदर को दूसरी महिला के अंडे को आसानी से अपने गर्भ में रखने की अनुमति देता है: उसे गेस्टेशनल सरोगेट या गर्भ धारण करने वाली महिला के रूप में जाना जाता है। यह सरोगेसी का सबसे सामान्य रूप है और यह दोनों अभिभावकों और सरोगेट के लिए सबसे ठोस कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।

जबकि सरोगेट मदर के लिए यह संभव है कि वे नाल के माध्यम से बच्चे को डीएनए में छोटे इन्क्रीमेंट्स में पास करें, वह बच्चे की आनुवांशिक माँ नहीं होती है।

गेस्टेशनल सरोगेसी और ट्रेडिशनल सरोगेसी में क्या अंतर है? – gestational aur traditional surrogacy main kya antar hai

सरोगेसी दो प्रकार की होती है- गेस्टेशनल सरोगेसी और पारंपरिक या ट्रेडिशनल सरोगेसी। एक सामान्य गेस्टेशनल सरोगेसी व्यवस्था में, माता-पिता इन विट्रो निषेचन के माध्यम से भ्रूण का निर्माण करते हैं। इन भ्रूणों में से एक या अधिक को सरोगेट (कभी-कभी गर्भकालीन वाहक  महिला गर्भ धारण कराती है, के रूप में जाना जाती  है) में प्रवेश किया जाता है, जो बच्चे या बच्चों को अपने गर्भ में वहन करती है, लेकिन उनका आपस में कोई आनुवंशिक संबंध नहीं होता है।

गेस्टेशनल सरोगेसी आधुनिक सरोगेसी व्यवस्था के अधिकांश हिस्से का वय्खायां करती है। इसके विपरीत, पारंपरिक या ट्रेडिशनल सरोगेट आमतौर पर कृत्रिम गर्भा धारण के माध्यम से गर्भवती हो जाते हैं, और बच्चो का उनके माता-पिता के लिए एक आनुवंशिक संबंध होता है।

सरोगेसी क्या है हिंदी में
सरोगेट मदर क्या है हिंदी में

सरोगेट मदर क्या है? – surrogate mother kya hoti hai in hindi

एक महिला जो दूसरी महिला की ओर से एक बच्चे को ले जाती है, या तो अपने अंडे से दूसरी महिला के साथी द्वारा निषेचित होती है, या दूसरी महिला से निषेचित अंडे के गर्भ में आरोपण से।

दो प्रकार की सरोगेट मदर हैं; ट्रेडिशनल और गेस्टेशनल। एक ट्रेडिशनल सरोगेट मदर जैविक रूप से उस बच्चे से संबंधित होती है जिसे वह कैरी करती है और गेस्टेशनल सरोगेट मदर नहीं होती है। चिकित्सकीय प्रगति के कारण, गेस्टेशनल सरोगेसी एक पारंपरिक सरोगेट की तुलना में अधिक सामान्य हो गई है।

सरोगेट माँ एक व्यक्ति या एक जोड़े के लिए ले जा सकती है, जो उन्हें एक थर्ड पार्टी सरोगेट एजेंसी, एक ऑनलाइन फोरम या एक निजी दोस्त या परिवार के सदस्य की मदद से मिला हो। कई सरोगेट मदर को सरोगेट व्यवस्था के दौरान उनके व्यक्तिगत समय और बलिदान के लिए मुआवजा दिया जाता है, इसे क्षतिपूर्ति सरोगेसी कहा जाता है।

सरोगेट मदर कैसे चुने – Surrogate mother ko kese chunne

यदि आपके पास पहले से ही मन में कोई सरोगेट नहीं है, जैसे कि एक दोस्त या परिवार के सदस्य, तो आप एक एजेंसी या फ़र्टिलिटी क्लिनिक से संपर्क कर सकते हैं जो आपको खोजने में मदद करेगा। अपने सरोगेट बच्चे के लिए एक वाहक चुनते समय विचार करने के लिए कई महत्वपूर्ण कारक हैं:

  • सरोगेट का मेडिकल हिस्ट्री  — इसमें एक आनुवंशिक प्रोफ़ाइल (केवल ट्रेडिशनल  सरोगेट) और रक्त परीक्षण  शामिल होना चाहिए।
  • सरोगेट का जीवन शैली जैसे की वह कोई नशीली या शराब वाली चीज़ो को अपने जीवन में ना यूज़ करती हो
  • सरोगेसी प्रक्रिया की लागत – इसमें सरोगेसी मुआवजा, स्वास्थ्य और जीवन बीमा, कानूनी शुल्क, एजेंसी शुल्क, मनोवैज्ञानिक स्क्रीनिंग और निगरानी, यात्रा लागत, चिकित्सा व्यय आदि  शामिल हैं।

भारत में सरोगेसी का खर्च 2019 में कितना आता है – India main surrogacy ka kharch 2019 main kitna aata hai

भारत में सरोगेसी की औसत लागत 10, 00,000 रुपये से लेकर  15, 00,000 रूपए तक होता है । भारत में सरोगेसी का खर्च का यह भिन्नता प्रजनन केंद्रों या सरोगेसी क्लीनिकों द्वारा तय किए गए विभिन्न नियमों और विनियमों के कारण है। आईवीएफ का चयन करें भारत सबसे अच्छा और सबसे कम लागत में सरोगेसी शुल्क प्रदान करता है। तो आपको वाक्ये ही  आईवीएफ का चयन करना चाहिए भारत में सरोगेसी उपचार का सबसे अच्छा और किफायती मूल्य सिर्फ INR 10 लाख है।

उम्मीद है दोस्तों आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा, और आपको सरोगेसी क्या है और सरोगेसी का खर्च कितना होता है? के बारे में पता चल गया होगा| यदि आपको कोई और परेशानी है तो नीचे कमेंट करके ज़रूर पूछे| हम आपकी सहायता करने के लिए तैयार है|

धन्यवाद

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बियर पीने के फायदे/नुकसान क्या हैं?

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बियर पीने के फायदे और नुकसान क्या हैं
बियर पीने के फायदे और नुकसान क्या हैं

Contents

नमस्कार दोस्तों यहां पर हम जानेंगे कि बियर पीने के फायदे/नुकसान क्या हैं?

बियर क्या हैं? – Beer kya hai in hindi

बियर दुनिया का सबसे पुराना और सबसे व्यापक रूप से खपत पेय पेय है; यह पानी और चाय के बाद, कुल मिलाकर तीसरा सबसे लोकप्रिय पेय है। मेसोपोटामिया में 2500 ईसा पूर्व से पता चलता है कि महिलाओं के लिए बियर पीना एक लोकप्रिय व्यवसाय था। बियर पौष्टिक भी है, हालांकि यह आपके विटामिन सी के स्तर को भी नष्ट कर सकता है। बियर फाइबर, साथ ही साथ पोटेशियम, मैग्नीशियम, और कई बी विटामिन जैसे बी 1, बी 2, बी 3, बी 5, बी 6, बी 9, और बी 12 जैसे कई अन्य खनिजों का एक उत्कृष्ट स्रोत है।

कई अध्ययनों से पता चल रहा है कि बियर सहित शराब के मध्यम सेवन से दिल के स्वस्थ प्रभाव हो सकते हैं, जिसमें पुरुषों को 30 से 35% तक कम किया जा सकता है।

बियर पीने के फायदे क्या हैं? – beer peene ke kya faayde hai in hindi

#1 बियर विटामिन में समृद्ध और फाइबर उच्च में होता है – beer vitamin me smiridh or fiber me ucch hai

बियर पीने के फायदे और नुकसान क्या हैं
बियर पीने के फायदे और नुकसान क्या हैं

बियर खमीर से विटामिन बी से भरा है। अनफ़िल्टर्ड बियर विशेष रूप से बी 3, बी 6 और फोलिक एसिड (बी 9) में उच्च है। सेल मरम्मत में बी 3 एड्स और बी 6 पीएमएस को आसान बनाता है। बृहदान्त्र कैंसर की रोकथाम में फोलिक एसिड एड्स। इसमें फाई भी होता है, जो प्राकृतिक रेचक के रूप में काम करता है। यह उस दर को भी कम कर देता है जिस पर भोजन आपके पेट को छोड़ देता है, जिसका अर्थ है कि यह भूख को दबाता है। इसलिए बियर का सेवन करें, और जानें कि आप ओवरईटिंग को रोक रहे हैं

#2 बियर पीने से किडनी स्वस्थ रहती है – beer peene se kidney healthy rhti hai

बियर पीने के फायदे और नुकसान क्या हैं
बियर पीने के फायदे और नुकसान क्या हैं

बियर आपके गुर्दे को स्वस्थ रखता है एक फिनिश अध्ययन ने अन्य मादक पेय पदार्थों के बीच बियर को बाहर निकाला, यह पाते हुए कि यह आपके गुर्दे के लिए बेहतर था। वास्तव में, आपके द्वारा पीने वाली बियर की प्रत्येक बोतल गुर्दे की पथरी के विकास को 40% तक कम करती है।

#3 कोरोनरी हृदय रोग (सीएचडी)।

इस बात के काफी पुख्ता सबूत हैं कि हल्की से मध्यम शराब की खपत में कार्डियो-प्रोटेक्टिव गुण होते हैं। कई अध्ययन मध्यम बियर पीने वालों में कम कोरोनरी हृदय रोग की घटनाओं को प्रदर्शित करते हैं। मॉडरेट पीने वालों को सीएचडी से संबंधित मृत्यु दर का जोखिम कम होता है, जैसे कि पीने वाले और परहेज़ करने वाले दोनों। बियर में विटामिन बी 6 रक्त होमोसिस्टीन में अल्कोहल-प्रेरित वृद्धि को रोकने के लिए भी लगता है, एक संभावित हृदय रोग जोखिम कारक है।

#4 बियर से विटामिन बी में वृद्धि होती है – beer se vitamin b bdhta hai

एक ड्यूक अध्ययन में पाया गया कि बियर पीने वाले प्रतिभागियों में उनके गैर-पीने वाले समकक्षों की तुलना में उनके रक्त में विटामिन बी 6 का स्तर 30% अधिक था, और शराब पीने वालों की तुलना में दोगुना है। बियर में विटामिन बी 12 और फोलिक एसिड भी होते हैं।

#5 बियर पीने से मधुमेह का खतरा कम होता है – beer peene se dibeties ka khtra kam hota hai

हार्वर्ड के अध्ययन के अनुसार, मध्यम आयु वर्ग के पुरुष जो प्रति दिन 2 ड्रिंक पीते थे, उन्हें टाइप 2 मधुमेह होने का खतरा 25% कम था। ऐसा इसलिए क्योंकि बियर में अल्कोहल की मात्रा डायबिटीज को रोकने वाली इंसुलिन गतिविधि को बढ़ा देती है।

#6 संधिशोथ

आरए के रूप में भी जाना जाता है, रुमेटीइड गठिया एक बीमारी का दर्द हो सकता है। आरए अनिवार्य रूप से जोड़ों की सूजन है जो बहुत कम उम्र में हो सकता है। प्रारंभिक लक्षणों में जोड़ों की लाली, सूजन और खराश शामिल हैं। लेकिन अच्छी खबर यह है कि आप इसे बियर की मदद से कर सकते हैं। बेशक, बियर अकेले उद्देश्य को हल करने वाली नहीं है। अपने आहार योजना में बियर के सीमित सेवन की मदद से और इसे उचित अभ्यास के साथ युग्मित करके, आप इस स्थिति का इलाज कर सकते हैं।

#7 बियर कोलेस्ट्रॉल कम करने का काम करती है – beer cholesterol kam krti hai

खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए एक मध्यम सेवन दिखाया गया है जो धमनियों को मोटा करता है, और यकृत में कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है (संभवतः इथेनॉल सामग्री के कारण)।
कड़वे घटक अच्छे एचडीएल कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाते हैं, जो खराब कोलेस्ट्रॉल के रक्तप्रवाह को साफ करने के लिए जिम्मेदार होते हैं

#8 बालों के लिए बियर अच्छा है – hair ke liye beer bhut achi hai

बियर पीना सेहत के लिए फायदेमंद है या नहीं, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि बियर से कई तरह के ब्यूटी फायदे मिल सकते हैं। यह त्वचा के साथ-साथ बालों के लिए बहुत अच्छा है। यह एक प्राकृतिक हेयर कंडीशनर है जो बालों को मुलायम बनाता है। अगर आप लंबे, सुंदर और मजबूत बाल चाहते हैं तो अपने बालों में बियर का इस्तेमाल करें।

#9 बियर हार्ट अटैक से बचने में मदद करता है – beer heart attack se bachata hai

यदि आप विटामिन से अधिक लाभ चाहते हैं, तो आपको बियर का सेवन करना चाहिए। रेड वाइन के अलावा, डार्क बियर में बड़ी मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं

#10 बियर सर्व-प्राकृतिक है – beer natural hai

बियर को एडिटिव्स और प्रिजर्वेटिव्स से भरा जाता है। सच्चाई यह है कि बियर संतरे के रस या दूध के रूप में सभी प्राकृतिक है (शायद और भी बहुत कुछ – उन दूध और OJ लेबल आश्चर्यचकित होंगे)। बियर को परिरक्षकों की आवश्यकता नहीं है क्योंकि इसमें शराब और हॉप्स हैं, जो दोनों प्राकृतिक संरक्षक हैं। बियर केवल “संसाधित” इस अर्थ में है कि रोटी है: यह पकाया जाता है और किण्वित होता है, फिर फ़िल्टर्ड और पैक किया जाता है। हाइनकेन के लिए भी यही कहा जा सकता है।

बियर पीने के नुकसान क्या हैं? – Beer peene ke nukshaan kya hai

#1 रक्त शर्करा के स्तर के साथ हस्तक्षेप

बियर पीने के फायदे और नुकसान क्या हैं?
बियर पीने के फायदे और नुकसान क्या हैं?

बियर पीने से वास्तव में आपके शरीर के रक्त शर्करा के स्तर में बाधा आ सकती है। लीवर इसमें संग्रहीत ग्लाइकोजन को ग्लूकोज में परिवर्तित करता है और इसे रक्त प्रवाह में छोड़ता है। बियर में अल्कोहल वास्तव में इस प्रक्रिया में हस्तक्षेप करता है। यह भूख के दर्द पैदा कर सकता है और आपको अधिक भोजन पर जोर देना छोड़ देगा। इससे वजन बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। यह नीचे बियर gulping से पहले एक उचित भोजन लेने से गिना जा सकता है।

#2 बियर बेली – Beer Belly

शराब का सेवन लंबे समय से वजन बढ़ाने से जुड़ा हुआ है। बियर, विशेष रूप से, अधिकांश फ्लैक लेती है, इसलिए शब्द “बियर बेली” जो अक्सर पेय के नियमित उपभोक्ताओं द्वारा स्पोर्ट किए गए कुख्यात पंच को संदर्भित करता है। हालांकि सेवन से वजन सामान्य रूप से बढ़ सकता है, यह अक्सर बियर पीने वालों से जुड़ा होता है और इसका कारण बियर की लोकप्रियता हो सकती है। आखिरकार, यह पानी और चाय के बाद तीसरा सबसे व्यापक रूप से खाया जाने वाला पेय है।

#3 बियर पीने से अगले दिन बीमारी का सामना करना पढ सकता है – Beer peene ke baad aapko bimari ka saamna krna pd skta hai

अगले दिन, जो लोग बड़ी मात्रा में बियर का सेवन करते हैं, उन्हें कपास के मुंह और अन्य लक्षणों के साथ एक गंभीर सिरदर्द हो सकता है जो निश्चित रूप से जीवन की गुणवत्ता पर कुछ बहुत बुरा प्रभाव डालेंगे।

#4 ग्लूटेन – Gluten

अधिकांश बियर में अन्य अवयवों के बीच में माल्टेड जौ होता है, और जौ में लस नामक एक प्रोटीन होता है। कुछ लोग ग्लूटेन के प्रति संवेदनशील होते हैं। इस संवेदनशीलता के चरम अंत में सीलिएक रोग है, एक विकार जिसमें लस शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को छोटी आंत के अस्तर पर हमला करता है। यदि आप ग्लूटेन संवेदनशीलता से पीड़ित हैं, तो जौ से बनी बियर से बचें। सीलिएक रोग की बढ़ती जागरूकता के लिए धन्यवाद, कुछ शराब बनाने वाले अब लस मुक्त बियर की पेशकश कर रहे हैं।

#5 नाराज़गी।

यह बियर में गैस्ट्रिक एसिड के शक्तिशाली उत्तेजक के कारण गैस्ट्रोओसोफेगल रिफ्लेक्स के कारण होता है।

#6 लिवर खराब होना। – Liver Khrab ho skta hai

लंबे समय तक भारी शराब पीने वालों में लिवर की बीमारी होने का खतरा अधिक होता है। वसायुक्त यकृत (स्टीटोसिस)

#7 नशा / हानि।

अल्कोहल की कम मात्रा भी ध्यान और मोटर कौशल पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। वास्तव में, कई गंभीर दुर्घटनाएं शराब से संबंधित हैं। इसमें स्पष्ट रूप से मोटर वाहन शामिल हैं लेकिन इसमें आपकी कुर्सी का गिरना, सीढ़ियों से नीचे उतरना, खिड़कियों से बाहर निकलना आदि शामिल हो सकते हैं।

तो यह बात है। बियर पियो। आप लंबे समय तक जीवित रहेंगे और खुश रहेंगे। आप मोटे नहीं होंगे। वास्तव में, आप कम वजन कर सकते हैं। आप अपने चयापचय को बढ़ावा देंगे, अपने स्वास्थ्य में सुधार करेंगे और भरा हुआ धमनियों, दिल के दौरे और कैंसर के जोखिम को कम करेंगे। आप और अधिक क्या चाह सकते थे?

उम्मीद है दोस्तों आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा, और आपको बियर पीने के फायदे/नुकसान क्या हैं के बारे में पता चल गया होगा| यदि आपको कोई और परेशानी है तो नीचे कमेंट करके ज़रूर पूछे| हम आपकी सहायता करने के लिए तैयार है|

धन्यवाद

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शरीर मे खून की कमी से क्या होता है और खून की कमी को कैसे दूर करे

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शरीर मे खून की कमी से क्या होता है
शरीर मे खून की कमी से क्या होता है

नमस्कार दोस्तों यहां पर हम जानेंगे कि शरीर मे खून की कमी से क्या होता है और खून की कमी को कैसे दूर करे?

पहले के लोगो मे ऐसी कमियाँ नही आती थी क्यूकी पहले का वातावरण भी अच्छा था और खाने की सामग्री मे कोई मिलावट नही होती थी कुछ भी खाये उसमे पर्याप्त मात्रा मे पोस्टिक तत्व मिल जाया करते थे जिससे शरीर मे खून की कमी नही होती थी लेकिन आज के लोगो मे ये रोग बहुत समान्य हो गया है पुरे भारत मे 60 % लोग इस बीमारी से जूझ रहे है 60 % मे महिलाओ की संख्या ज्यादा है |खून की कमी को एनीमिया नाम दिया गया है | महिलाये जब बच्चे को जन्म देती है तो उनको खून की बहुत आवश्यकता होती इसलिए उनको उस समय ज्यादा से ज्यादा पोस्टिक आहार देना चाहिए लेकिन उन्हे ये सब मिल नही पता है इसलिए महिलाओ की % ज्यादा होती है , खून की कमी को दूर करने के लिए ये जानाना पड़ेगा की किस कारण से हुआ है ये और उसके लक्षण क्या है |

आइए जानते है खून के कमी के कारण क्या है | – khoon ki kami ke karan kya hai

खून की कमी का सबसे बड़ा कारण है हमारा भोजन आज कल यूरिया डाल के सब सब्जी और अन्य सामग्री को तैयार किया जा रहा है जिससे उसमे कोई भी पोस्टिक आहार नही बच पा रहा है और हर व्यक्ति इसका सेवन कर रहा जिससे शरीर मे आयरन की कमी हो जा रही है और आयरन की कमी से ही शरीर मे खून की कमी होती है हरी सब्जी खाने से शरीर को आयरन मिलता जिससे खून की कमी को को दूर रख सकते है |महिलाओ मे इसलिए खून की कमी ज्यादा होती है क्यूकी उनका मसीक चक्र चलता उसमे उनका बहुत खून खराब हो जाता है| और किसी-किसी को कुछ न कुछ बिमारी रहती है जिससे शरीर मे उपस्थित कुछ कोशिका अच्छे से काम नही करती है जिससे शरीर मे पर्याप्त मात्रा मे ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाता है जो खून की कमी का बहुत बड़ा कारण है और खून की कमी से शरीर पीली और कमजोर हो जाती है | इसलिए इन सब लक्षणो को जाने और उसका उपाय करे |

शरीर मे खून की कमी से क्या होता है
शरीर मे खून की कमी से क्या होता है

खून की कमी के लक्षण निम्न है | – khoone ki kami ke lakshan in hindi

1) यदि आपके शरीर मे खून की कमी है तो आप को हमेसा थकान महसूस होगी|

2) खून की कमी से शरीर का रंग पीला पड़ने लगता है ,नाखून और दांत भी पीले हो जाते है|

3) खून की कमी से लोग कमजोर हो जाते है और उनकी काम करने की क्षमता कम हो जाती है |

4) खून की कमी से आखो पे बहुत प्रभाव पड़ता है आखो के सामने सब काला-काला दिखाई देने लगता है , अचानक से सब गायब हो जाता है |

5) खून की कमी से शरीर के अंग कभी-कभी काम नही करते है उस समय हवा मारने का ज्यादा मौका होता है (मतलब लकवा मरने का )|

6) खून की कमी से बहुत ज्याद नींद आती है ,इसलिए लोग ज्यादा देर तक सोते रहते है |

7) खून की कमी से शरीर मे हीमोग्लोबिन की कमी हो जाती है जिससे कार्य करने की क्षमता कम हो जाती है |

ये सभी लक्षण यह बताते है की आपके शरीर मे खून की कमी है|

खून की कमी को कैसे दूर करे | – khoon ki kami ko kaise door kare

खून की कमी को दूर करने के लिए लिए आपको कुछ ज्यादा परहेज नही करना होता है लेकिन ध्यान देना पड़ता है की क्या खाना है और कैसे खाना है जो निम्न है |

  1. खून की कमी से शरीर मे आयरन की कमी हो जाती है जिसको दूर करने के लिए आपको हरी पत्तियों वाली सब्जी खाना चाहिए |
  2. खून की कमी से शरीर मे कमजोरी आ जाती जिसके लिए आपको पोस्टिक आहार लेना चाहिए|
  3. फलो का ज्यादा प्रयोग करना चाहिए |
  4. महिलाओ को खास तौर पे जब प्रेग्नेंनसी चल रही हो तो उस समय बहुत ज्यादा ध्यान देना पड़ता है क्यूकी इस समय महिलाओ का ज्यादा खून खराब हो जाता है इसलिए संतुलन बनाए रखने के लिए ज्यादा मात्रा मे पोस्टिक आहार लेना चाहिए |

आज-कल एनीमिया की बीमारी लोगो के लिए समान्य हो गयी है लेकिन इसका बहुत ज्यादा दुष्प्रभाव बच्चो पर पड़ रहा है इसलिए बड़ो को इसका ध्यान रखना चाहिए |

उम्मीद है दोस्तों आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा, और आपको शरीर मे खून की कमी से क्या होता है और खून की कमी को कैसे दूर करे के बारे में पता चल गया होगा| यदि आपको कोई और परेशानी है तो नीचे कमेंट करके ज़रूर पूछे| हम आपकी सहायता करने के लिए तैयार है|

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विटामिन E सबसे ज्यादा किसमें पाया जाता है और इसके फायदे क्या है

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विटामिन E सबसे ज्यादा किसमें पाया जाता है और इसके फायदे क्या है
विटामिन E सबसे ज्यादा किसमें पाया जाता है और इसके फायदे क्या है

विटामिन ई(VITAMIN E)

इसको इस्तेमाल करने के कुछ फायदे व नुकसान के बारे में हम इस आर्टिकल में विस्तार से जानेंगे |

विटामिन ई कई रूपों वाला वसा में घुलनशील विटामिन है, लेकिन अल्फा-टोकोफेरोल मानव शरीर द्वारा उपयोग किया जाने वाला एकमात्र है। इसकी मुख्य भूमिका एक एंटीऑक्सिडेंट के रूप में कार्य करना है |

विटामिन ई के कुछ अन्य नाम – Some other names of Vitamin E

Acétate डी एलोफा टोकोफ़ेरोल, एसीटेट डी एल्फा टोकोफ़ेरील, एसीटेट डी डी-अल्फा-टोकोफ़ेरील, एसीटेट डी डीएल-अल्फा-टोकोफ़ेरिल, एसीटेट डी टोकोफ़ेरिल, एसीटेट डी टोकोफ़ेरील, एसीटेट डे राह-अल्फा-टोकोफ़ेरॉल, अल्फा-टोकोफ़ेरॉल, अल्फा टोकोफेरोल एसीटेट, अल्फा टोकोफ़ेरील एसीटेट, अल्फा टोकोट्रिनॉल, अल्फा टोकोट्रिऑनॉल, अल्फा-टोकोफ़ेरॉल, अल्फा-टोकोफ़ेरॉल, बीटा-टोकोट्रिओनॉल, बोत्ता-टूकोट्रिओलेन-बीटा-टोकोट्रिऑन-अल्फ़ा , डी-अल्फा टोकोफेरोल, डी-अल्फा टोकोफ़ेरोल, डी-अल्फा टोकोफ़ेरील सक्सेनेट, डी-अल्फा टोकोफ़ेरील एसीटेट, डी-अल्फा टोकोट्रिऑनोल, डी-अल्फा टोकोफेरिनोल, डी-अल्फा-टोकोफ़ेरॉल, डी-अल्फा-टोकोफ़ेरॉल, डी-अल्फा-टोकोफ़ेरोल, डी-अल्फा-टोकोफ़ेरोल एसीटेट, डी-अल्फा-टोकोफेरील एसिड सक्विनेट, डी-अल्फा-टोकोफेरील सक्विनेट, डी-अल्फा-टोकोफेरील, डी-अल्फा-टोकोफेरील, डी-बीटा-टोकोफेरोल, डी-बोटा-टोकोफेरोल, डी-डेल्टा-टोकोफेरोल, डी-डेल्टा-टोकोफेरोल, डी-डेल्टा -टॉक्सोएरोल, डेल्टा टोकोट्रिनॉल, डेल्टा-टोकोट्रिनोल, डेल्टा-टोकोफेरोल, डेल्टा-टोकोफेरोल, डी-गामा टोकोट्रिऑनोल, डी- गामा-टोकोट्रिनॉल, डी-गामा-टोकोफेरोल, डी-गामा-टोकोफ़ेरॉल, डीएल-अल्फा-टोकोफ़ेरॉल, डीएल-अल्फा-टोकोफ़ेरोल, डीएल-अल्फा-टोकोफ़ेरील एसीटेट, डीएल-अल्फा-टोकोफ़ेरील, डीएल-अल्फा-टोकोफ़ेरील, डीएल-अल्फा-टोकोफ़ेरील। , डीएल-टोकोफ़ेरोल, डी-टोकोफेरोल, डी-टोकोफ़ेरोल, डी-टोकोफ़ेरील एसीटेट, वसा में घुलनशील विटामिन, गामा टोकोट्रिनॉल, गामा-टोकोट्रिनॉल, गामा-टोकोफेरोल, गामा-टोकोफेरोल, मिश्रित टोकोफेरोल, मिश्रित टोकोफेरोल, मिश्रित टोकोफेरोल, मिश्रित टोकोफ़ेरॉल आरआरआर-अल्फा-टोकोफेरॉल, आरआरआर-अल्फा-टोकोफ़ेरॉल, सक्सेन्ड एसीड डी डी-अल्फा-टोकोफ़ेरील, सक्सेनेट एकाइड डी टोकोफ़्रील, सक्सेनेट डी डी-अल्फा-टोकोफ़ेरील, सक्सेनेट डी टोकोफ़्रील, सक्सेनेट डी टोक्सामाइन, टी। सी। टी। वाई। टोकोफेरिल्स मिक्सटे, टोकोट्रिऑनल्स डी पालमे, टोकोट्रिऑनोलस डी रिज़, टोकोट्रिऑनोलस मिक्सटेक्स, टोकोफ़ेरील एसीटेट, टोकोफ़ेरील एसिड सोकिट, टोकोफ़ेरील सक्विनेट, टोकोफ़ेरीनल सूट, टोकोट्रिऑनोल, टोकोट्रिअनोल, टोकोट्रिअनोल, टोकोट्रिअनोल डीकोटे Liposolub ले, विटामाइन घुलनशील डेन लेस ग्रेसिस

विटामिन ई के मुख्य स्त्रोत – Main sources of Vitamin E in Hindi

  • विटामिन ई पौधे-आधारित तेलों, नट्स, बीज, फल और सब्जियों में पाया जाता है।
  • गेहूं के बीज का तेल
  • सूरजमुखी, कुसुम, और सोयाबीन तेल
  • सूरजमुखी के बीज
  • बादाम
  • मूंगफली, मूंगफली का मक्खन
  • बीट साग, कोलार्ड साग, पालक
  • कद्दू
  • लाल शिमला मिर्च
  • एस्परैगस
  • आम
  • एवोकाडो

विटामिन ई क्या है और इसके फायदे क्या है – What is vitamin E and what are its benefits in hindi

विटामिन ई, एक विटामिन है जो वसा में घुल जाता है। यह वनस्पति तेलों, अनाज, मांस, मुर्गी , अंडे, फल, सब्जियां और वीट जर्म  के तेल सहित कई खाद्य पदार्थों में पाया जाता है। यह एक सप्लीमेंट  के रूप में भी उपलब्ध है।

कुछ लोग उम्र बढ़ने से बचाने और कैंसर थेरेपी (कीमोथेरेपी) के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रसायनों के त्वचा के प्रभावों से बचाने के लिए अपनी त्वचा पर विटामिन ई लगाते हैं।

विटामिन ई का उपयोग विटामिन ई की कमी के इलाज के लिए किया जाता है, जो दुर्लभ है, लेकिन कुछ आनुवंशिक बीमारी  वाले लोगों में और बहुत कम वजन वाले जोकि समय से पहले जन्म शिशुओं में हो सकता है।

कुछ लोग धमनियों के सख्त होने, दिल का दौरा पड़ने , सीने में दर्द, अवरुद्ध धमनियों के कारण पैर में दर्द और हाई ब्लड प्रेशर  सहित दिल और रक्त वाहिकाओं के रोगों के इलाज करने और रोकथाम के लिए विटामिन ई का उपयोग करते हैं।

विटामिन ई का उपयोग मधुमेह या डॉयबिटीज़  और इसकी जटिलताओं के इलाज के लिए भी किया जाता है। इसका उपयोग धूम्रपान करने वालों में कैंसर, विशेष रूप से फेफड़े और मुंह के कैंसर को रोकने के लिए किया जाता है; कोलोरेक्टल कैंसर और पॉलीप्स; और गैस्ट्रिक, प्रोस्टेट और अग्नाशय के कैंसर।

कुछ लोग मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के रोगों के लिए विटामिन ई का उपयोग करते हैं, जिसमें अल्जाइमर रोग और अन्य मानसिक बीमारी, पार्किंसंस रोग, रात में ऐंठन, पैर में दर्द, मिर्गी और अन्य दवाओं के साथ। हंटिंगटन की कोरिया, और नसों और मांसपेशियों से जुड़े अन्य विकारों के लिए विटामिन ई का उपयोग किया जाता है।

कुछ लोग मस्तिष्क और तंत्रिका तंत्र के रोगों के लिए विटामिन ई का उपयोग करते हैं, जिसमें अल्जाइमर रोग और अन्य मनोभ्रंश, पार्किंसंस रोग, रात में ऐंठन, पैर में दर्द, मिर्गी और अन्य दवाओं के साथ। हंटिंगटन  कोरिया, और नसों और मांसपेशियों से जुड़े अन्य विकारों के लिए विटामिन ई का उपयोग किया जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर (प्री-एक्लेमप्सिया), प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस), दर्दनाक पीरियड में , रजोनिवृत्ति सिंड्रोम, स्तन कैंसर से जुड़े तप्त झलक  और स्तन अल्सर के कारण देर से गर्भावस्था में जटिलताओं को रोकने के लिए महिलाएं विटामिन ई का उपयोग करती हैं।

विटामिन E सबसे ज्यादा किसमें पाया जाता है और इसके फायदे क्या है
विटामिन E सबसे ज्यादा किसमें पाया जाता है और इसके फायदे क्या है

विटामिन ई के कमी के कुछ संकेत – Some signs of vitamin E deficiency in hindi

क्योंकि विटामिन ई विभिन्न खाद्य पदार्थों और सप्लीमेंट्स में पाया जाता है|  जिन लोगों को पाचन संबंधी विकार हैं या वे वसा को ठीक से अवशोषित नहीं करते हैं (जैसे, अग्नाशयशोथ, सिस्टिक फाइब्रोसिस, सीलिएक रोग) एक विटामिन ई की कमी विकसित कर सकते हैं। निम्नलिखित कमी के सामान्य संकेत हैं:

रेटिनोपैथी (दृष्टि को प्रभावित कर सकने वाली आँखों की रेटिना को नुकसान)

पेरीफेरल  न्यूरोपैथी (नसों का सिकुड़ जाना , आमतौर पर हाथ या पैर में, कमजोरी या दर्द का कारण)

अटैक्सिआ (शरीर के मूवमेंट्स  के नियंत्रण का नुकसान)

इम्यून सिस्टम मेंं कमी

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जिम जाने के पहले और बाद मे क्या खाये

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जिम जाने के पहले और बाद मे क्या खाये
जिम जाने के पहले और बाद मे क्या खाये

आज कल हर व्यक्ति सोचता है की उसको कोई बीमारी हो और वह स्वस्थ रहे इस लिए लोग जिम करते है जब लोग जिम करते है तो उनको सोचना पड़ता है की वो जिम जाने के पहले और जिम से आने के बाद क्या खाये क्यूकी केवल जिम जाने से कुछ नही होता है जिम जाने वाले लोगो को उसके अनुसार पोस्टिक आहार लेना भी जरूरी होता है | इसलिए आपको पता होना चाहिए की आप जिम जाने के पहले क्या खाये और आने के बाद क्या खाये , हम इसके बारे आगे देखेगे | –

कोई भी शारीरक मेहनत करने के लिए शरीर मे एनर्जि लेवल अधिक होना जरूरी होता है  क्यूकी मेहनत करते वक़्त आपकी एनर्जि लेवल कम होती है इसलिए शरीर से काम ले तो ये ध्यान रखे की आप के शरीर मे कितनी एनर्जि है |

इसीलिए जिम जाने के पहले कुछ ऐसी चिजे खानी चाहिए की वो आपके शरीर के एनर्जि लेवेल को बनाए रखे और जिम जाने से पहले भारी आहार नही लेना चाहिए क्यूकी आप जब जिम जाते है तो आपकी शरीर हल्की होनी चाहिए ताकि आप ज्यादा से ज्यादा वरजिस कर सके | क्यूकी जितनी एनर्जि आपके पास होगी उतना ही आप वरजिस कर सकेगे क्यूकी जैसे –जैसे आप मेहनत करेगे एनर्जि लेवल कम होगी और यदि शरीर मे ज्यादा मात्रा मे खाना है तो बहुत जल्दी थक जाएगे  इसलिए ज्यादा भारी खाना नही खाना चाहिए |

जिम जाने के पहले और बाद मे क्या खाये
जिम जाने के पहले और बाद मे क्या खाये

जिम जाने से पहले क्या चीजे लेनी चाहिए निम्नलिखित है

  1. दो अंडे ले सकते है आप अंडे को उबले के भी ले सकते है लेकिन अंडे का पीला भाग निकाल के अंडे को खाये |
  2. बादाम , काजू , दूध ,अखरोट आदि मे जरूरी पोषक तत्व पाये जाते है आप इनको जिम जाने के पहले खा सकते है क्यूकी इन सब से भी शरीर मे एनर्जि बनती है |
  3. सेब ,केला ,सलाद या अन्य फल भी खा सकते है क्यूकी सभी प्रकार के फल मे कुछ न कुछ प्रोटीन पाया जाता है जिससे हमारे शरीर को एनर्जि मिलती है तो आप इन सब को भी जिम करने के पहले ले सकते है | 
  4. ओटस मे फाइबर की मात्रा अधिक पायी जाती है जो जिम के समय एनर्जि को बनाए रखता है इस लिए आप इसका सेवन कर सकते है |
  5. ब्राउन ब्रैड का सेवन कर सकते इसमे भी पर्याप्त मात्रा मे ऊर्जा पायी जाती है जो हमरी शरीर के लिए बहुत जरूरी होता है|

जिम करने के बाद क्या खाये

जिम करने के बाद आपकी शरीर की एनर्जि खतम हो जाती है इसलिए आपको कुछ न कुछ पोषक तत्व वाले सामग्री का सेवन करना चाहिए क्यूकी आपकी पूरी शरीर की मसल्स भी फ्री रहती है तो कोई भी चीज आप खायेगे तो उसका पूरा प्रोटीन आपकी शरीर मे लगता है और आप की शरीर का ग्रो बहुत जल्दी होता है | इसलिए आप को निम्न चीजों का सेवन करना चाहिए –

  1. ताजे फलो का सेवन बहुत अधिक असरदार होता है इसलिए आप फलो का सेवन करे |
  2. केला ,ओटस मिल का सेवन करे जिम के बाद शरीर बहुत रिलैक्स होती है तो बहुत फर्क पड़ता है इसलिए आप ज्यादा से ज्यादा पोस्टिक आहार का सेवन करे|
  3. बादाम ,पिस्ता,दूध- ये सब भी शरीर के लिए बहुत अच्छा होता है इसलिए आप इसे भी ले सकते है |
  4. नॉन-वेज खाने वाले लोग अंडा, मुर्गा, मछली आदि का सेवन कर सकते है ये सब तो बहुत ज्यादा एनर्जि वाली चिजे है और शरीर पर बहुत तेजी से काम करती है |
  5. अंकुरित चना ,अंकुरित दल मे प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है इसका भी सेवन किया जाता है |
  6. और साधारण खाना तो हर व्यक्ति खाता है और सब्जी , रोटी , चावल तो हमारे शरीर के बहुत ही ज्यादा जरूरी है आप इसके बिना नही रह सकते है |

कुछ महत्वपूर्ण बाते

उबले हुए आलू मे कार्बोहाईड्रेड अधिक मात्रा मे पायी जाती है | जो शरीर से कमजोर है जिम जाने से पहले जरूर ले | और सभी लोगो को जिम करने के बाद एक गिलास पानी जरूर पीना चाहिए |और जिम करने वाले सभी लोग रोजन एक चमच घी का सेवन करे इससे एनर्जि लेवल बना रहता है |

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टेस्ट ट्यूब बेबी क्या है? – भारत में टेस्ट ट्यूब बेबी का खर्च 2019 में कितना आता है?

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टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक: टेस्ट ट्यूब बेबी क्या है? – Test tube baby kya hai hindi me

एक टेस्ट ट्यूब बेबी महिला के शरीर के बाहर एक बच्चा होता है। वास्तव में, यह इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) द्वारा कल्पना की गई एक बच्ची है, जहाँ अंडे को शरीर के बाहर निषेचित किया जाता है, प्रयोगशाला डिश में और फिर इसे एक महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है।

दुनिया में पहला टेस्ट ट्यूब बेबी – Duniya ka phla test tube baby

आईवीएफ उपचार द्वारा पैदा होने वाले बच्चे का पहला सफल जन्म 1978 में हुआ था। लुईस ब्राउन प्राकृतिक चक्र आईवीएफ के परिणामस्वरूप पैदा हुआ पहला बच्चा था जहां कोई उत्तेजना नहीं हुई थी।

भारत में पहला टेस्ट ट्यूब बेबी – India ka phla test tube baby

डॉ। सुभाष मुखोपाध्याय ने इतिहास रचा जब वे भारत में पहले चिकित्सक बने (और ब्रिटिश चिकित्सकों पैट्रिक स्टेप्टो और रॉबर्ट एडवर्ड्स के बाद दुनिया में दूसरे) इन विट्रो फर्टिलाइजेशन करने के लिए एक टेस्ट ट्यूब बेबी “दुर्गा” (कनुप्रिया अग्रवाल) अक्टूबर को बनाया गया 3, 1978।

डॉ। मुखोपाध्याय और ब्रिटिश वैज्ञानिक रॉबर्ट जी एडवर्ड्स और पैट्रिक स्टेप्टो दोनों – दुनिया के पहले टेस्ट-ट्यूब बेबी के निर्माता – ने उसी समय काम शुरू किया। भारतीय बच्चे का जन्म मैरी लुईस ब्राउन के जन्म के ठीक 67 दिन बाद 3 अक्टूबर 1978 को हुआ था।

भारत में बांझपन का अधिक बोझ है, जिसमें 22 से 33 मिलियन जोड़े प्रजनन काल में जीवन भर बांझपन से पीड़ित हैं। इन जोड़ों के लिए, उन्नत चिकित्सा विज्ञान की ओर रुख करना एकमात्र विकल्प प्रतीत होता है।

कैसे आम है आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक? – IVF or Test Tube Baby Technique in hindi

2016 तक, कुछ 6.5 मिलियन बच्चे इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) का उपयोग करके पैदा हुए थे। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (सीडीसी) के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका में हर साल पैदा होने वाले लगभग 1.6% शिशुओं की सहायता प्रजनन तकनीक (एआरटी) के माध्यम से की जाती है।

एक सामान्य गर्भावस्था में, एक पुरुष शुक्राणु एक महिला के अंडे में प्रवेश करता है और ओव्यूलेशन के बाद उसके शरीर के अंदर निषेचित करता है, जब अंडाशय से एक परिपक्व अंडा निकलता है।
निषेचित अंडा फिर खुद को गर्भाशय, या गर्भ की दीवार से जोड़ता है, और एक बच्चे में विकसित होने लगता है। इसे प्राकृतिक गर्भाधान के रूप में जाना जाता है।

हालांकि, अगर प्राकृतिक या बिना गर्भ धारण संभव नहीं है, तो प्रजनन उपचार एक व्यवहार्य विकल्प है। आईवीएफ या टेस्ट ट्यूब बेबी एक ऐसा विकल्प है।

टेस्ट ट्यूब बेबी क्या है - भारत में टेस्ट ट्यूब बेबी का खर्च कितना आता है 2019
भारत में टेस्ट ट्यूब बेबी का खर्च 2019 में कितना आता है

टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया या आईवीएफ प्रक्रिया (चरण-दर-चरण) – Test tube baby kese kaam krta hai hindi me

क्लिनिक के आधार पर तकनीकें थोड़ी भिन्न हो सकती हैं, लेकिन IVF में आमतौर पर निम्नलिखित चरण शामिल होते हैं:

टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया चरण-दर-चरण

1. प्राकृतिक मासिक धर्म चक्र को दबाना
महिला एक दवा प्राप्त करती है, आमतौर पर दैनिक इंजेक्शन के रूप में लगभग 2 सप्ताह तक, अपने प्राकृतिक मासिक धर्म चक्र को दबाने के लिए।

2. सुपर ओव्यूलेशन
फर्टिलिटी हार्मोन फॉलिकल स्टिमुलेटिंग हार्मोन (FSH) युक्त फर्टिलिटी ड्रग्स महिला को दी जाती हैं। एफएसएच अंडाशय को सामान्य से अधिक अंडे का उत्पादन करता है। योनि अल्ट्रासाउंड स्कैन अंडाशय में प्रक्रिया की निगरानी कर सकते हैं।

3. अंडे को पुनः प्राप्त करना

अंडों को एक छोटी शल्य प्रक्रिया के माध्यम से एकत्र किया जाता है जिसे “कूपिक आकांक्षा” के रूप में जाना जाता है। योनि के माध्यम से और एक अंडाशय में एक बहुत पतली सुई डाली जाती है। सुई जो एक सक्शन डिवाइस से जुड़ी होती है। यह अंडे को चूसता है। यह प्रक्रिया प्रत्येक अंडाशय के लिए दोहराई जाती है।

2011 में, शोधकर्ताओं ने सुझाव दिया कि एक चक्र में अंडाशय से 15 अंडे एकत्र करना एक सफल गर्भावस्था का उच्चतम मौका देता है।

जमे हुए या दान किए गए अंडे भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

4. गर्भाधान और निषेचन

जो अंडे एकत्र किए गए हैं, उन्हें नर शुक्राणु के साथ रखा जाता है और पर्यावरण नियंत्रित कक्ष में रखा जाता है। कुछ घंटों के बाद, शुक्राणु को अंडे में प्रवेश करना चाहिए।
कभी-कभी शुक्राणु को सीधे अंडे में इंजेक्ट किया जाता है। इसे इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (ICSI) के रूप में जाना जाता है।
फ्रोजन शुक्राणु, वृषण बायोप्सी के माध्यम से पुनः प्राप्त, इस्तेमाल किया जा सकता है। यह एक सफल गर्भावस्था को प्राप्त करने में ताजा शुक्राणु के रूप में प्रभावी माना जाता है।
निषेचित अंडा विभाजित हो जाता है और एक भ्रूण बन जाता है।
इस बिंदु पर, कुछ केंद्र प्री-इम्प्लांटेशन जेनेटिक डायग्नोसिस (पीजीडी) प्रदान करते हैं जो आनुवंशिक विकारों के लिए भ्रूण की जांच कर सकते हैं। यह कुछ हद तक विवादास्पद है और हमेशा उपयोग नहीं किया जाता है।
एक या दो सबसे अच्छे भ्रूण स्थानांतरण के लिए चुने जाते हैं।
महिला को तब प्रोजेस्टेरोन या मानव कोरियोनिक गोनाडोट्रॉफिन (एचसीजी) दिया जाता है, ताकि गर्भ के अस्तर को भ्रूण प्राप्त करने में मदद मिल सके।

5. भ्रूण स्थानांतरण
कभी-कभी, गर्भ में एक से अधिक भ्रूण रखे जाते हैं। यह महत्वपूर्ण है कि एक बच्चा होने की इच्छा रखने वाले डॉक्टर और दंपति चर्चा करें कि कितने भ्रूण स्थानांतरित किए जाने चाहिए। आम तौर पर, एक डॉक्टर केवल एक से अधिक भ्रूण स्थानांतरित करेगा यदि कोई आदर्श भ्रूण उपलब्ध नहीं है।
भ्रूण का स्थानांतरण एक पतली ट्यूब, या कैथेटर का उपयोग करके किया जाता है। यह योनि के माध्यम से गर्भ में प्रवेश करता है। जब भ्रूण गर्भ के अस्तर से चिपक जाता है, स्वस्थ भ्रूण विकास शुरू हो सकता है।

क्या टेस्ट ट्यूब बेबी प्रक्रिया दर्दनाक है? – kya test tube baby prakirya painful hai

एक आईवीएफ चक्र के दौरान दर्द के कई संभावित स्रोत हैं।

1) मासिक धर्म चक्र और ओव्यूलेशन उत्तेजना का दमन:
सबसे पहले अंडे की फसल की तैयारी हो सकती है। अंडों को विकसित करने में मदद करने के लिए इंजेक्टेबल दवाएं लेना मानक अभ्यास है। ये छोटे सुइयों और आधुनिक इंजेक्शन पेन उपकरणों के साथ किया जाता है। लगभग सभी लोग अज्ञात के डर से पहला इंजेक्शन लगाते हैं, लेकिन शुरुआती चिंता समाप्त होने के बाद, ज्यादातर महिलाएं रिपोर्ट करती हैं कि इंजेक्शन का दर्द कुछ भी नहीं है। सुइयां छोटी हैं और अंदर और बाहर तेज और आसान आती हैं। महिलाओं ने इसे कुछ आसान और पीड़ा के रूप में रिपोर्ट किया

2) ओव्यूलेशन:
दर्द का अगला संभावित स्रोत तब होता है जब अंडे विकसित होते हैं, जब अंडाशय बड़े होने लगते हैं, जिससे सूजन होती है। यह एक बहुत ही वास्तविक घटना है, और हमारे द्वारा विकसित किए जाने वाले अंडों की संख्या को सीमित करने के अलावा इसके बारे में बहुत कुछ किया जा सकता है। बेशक, यह एक व्यापार है, क्योंकि यदि आपके पास केवल 4-5 अंडे हैं, तो दर्द और सूजन कम से कम है, लेकिन आपकी सफलता दर कम होने वाली है। महिलाओं ने इस चरण को SOMWHAT DISCOMFORTING के रूप में रिपोर्ट किया

3) अंडा पुनर्प्राप्ति:
तीसरा चरण जहां संभावित दर्द हो सकता है, वह अंडा पुनर्प्राप्ति के दिन ही आता है। यह अच्छी तरह से पता है कि अंडाशय में योनि की दीवारों के माध्यम से एक पतली लंबी सुई को छेदकर अंडे को हटा दिया जाता है, कई महिलाएं उस दिन महान दर्द का अनुमान लगाती हैं। लेकिन वास्तव में, प्रक्रिया के दौरान दर्द शून्य है, आधुनिक संज्ञाहरण के लिए धन्यवाद। सभी फर्टिलिटी क्लीनिकों में एनेस्थेसियोलॉजिस्ट के लिए हर अंडे को पुनःप्राप्ति के लिए रखा जाता है ताकि मरीजों को दर्द से मुक्त रखा जा सके और पूरे मामले में सामान्य हृदय गति और सामान्य रक्त दबाव के साथ सांस ली जा सके। बेहोश करने की क्रिया की तुलना में पूर्ण संज्ञाहरण दर्द रहित है। पूर्ण संज्ञाहरण के तहत महिलाओं ने इस चरण को दर्द रहित होने की सूचना दी

4) गर्भाशय में भ्रूण स्थानांतरण:
अंडों को दोबारा प्राप्त करने के तीन दिन या पांच दिन बाद, भ्रूण को वापस गर्भाशय में स्थानांतरित कर दिया जाता है। महिलाओं द्वारा स्थानांतरण को ALMOST PAINLESS होने की सूचना दी गई है

5) प्रोजेस्टेरोन इंजेक्शन:
अंतिम चरण प्रोजेस्टेरोन इंजेक्शन है, जो गर्भावस्था को स्थापित करने में मदद करता है। चूंकि यह एक तेल-आधारित इंजेक्शन है, इसलिए सुई बड़ी है और इसलिए अधिक दर्दनाक है। इस पर राय कुछ रोगियों के साथ परिवर्तनशील है जो बहुत दर्द की रिपोर्ट करते हैं जबकि कुछ इसे काफी सहनीय पाते हैं। जिन लोगों को वास्तव में यह असहनीय लगता है, उनके पास प्रोजेस्टेरोन को अन्य गैर-इंजेक्शन रूपों में लेने का विकल्प होता है, जैसे कि योनि क्रीम या योनि सपोसिटरीज। महिलाओं ने इस चरण को PAINFUL होने की सूचना दी।

भारत में टेस्ट ट्यूब बेबी का खर्च कितना आता है
भारत में टेस्ट ट्यूब बेबी का खर्च 2019 में कितना आता है

भारत में टेस्ट ट्यूब बेबी का खर्च 2019 में कितना आता है – test tube baby ka kharcha 2019

पूरी प्रक्रिया की लागत (1 समय के लिए) रुपये से लेकर है। 1,20,000 से रु। 2,20,000, व्यक्तिगत उपचार और प्रजनन दवाओं के उपयोग पर निर्भर करता है।

यदि किसी रोगी को आईवीएफ में उन्नत तकनीकी सहायता की आवश्यकता होती है, तो भारत में टेस्ट ट्यूब बेबी का खर्च बहुत अधिक हो सकती है। उदाहरण के लिए, आईसीएसआई उपचार के लिए अतिरिक्त रु। 1,50,000 से रु। 2,50,000। और एक FET (फ्रोजन एम्ब्रियो ट्रांसफर) प्रक्रिया के तहत मरीजों को लगभग रु। 1,20,000, भारत में आईवीएफ लागत के अलावा।

अन्य देशों में, आईवीएफ होने की लागत काफी अधिक है।

सामान्य प्रश्न:

1. आईवीएफ और टेस्ट ट्यूब बेबी में क्या अंतर है?
कोई अंतर नहीं है, आईवीएफ उपचार को आम शब्दों में टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक के रूप में जाना जाता है।

2. सरोगेसी और टेस्ट ट्यूब बेबी में क्या अंतर है?
एक टेस्ट ट्यूब बेबी को महिला के शरीर के बाहर निषेचित किया जाता है और फिर उसे माँ के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जाता है। कभी-कभी विभिन्न चिकित्सा स्थितियों के कारण, भ्रूण को मां के गर्भाशय में लागू नहीं किया जा सकता है। ऐसी स्थिति में भ्रूण को दूसरी महिला के गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया जा सकता है जो गर्भावस्था को समाप्त करने के लिए तैयार है। ऐसी महिला को सरोगेट करार दिया जाता है। इस विधि को सरोगेसी कहा जाता है। जन्म लेने वाला बच्चा आनुवंशिक रूप से सरोगेट से संबंधित नहीं है।

3. आईवीएफ के लिए कितने अंडे लेने चाहिए?
ह्यूमन रिप्रोडक्शन नामक पत्रिका में ऑनलाइन प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में पाया गया कि इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) चक्र में एक महिला के अंडाशय से लगभग 15 अंडे प्राप्त करने से एक महिला को एक सफल गर्भावस्था और जन्म का सबसे अच्छा मौका मिला।

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किडनी खराब होने के क्या संकेत है

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नमस्कार दोस्तों यहां पर हम जानेंगे कि किडनी खराब होना क्या होता है और किडनी खराब होने के क्या संकेत है?

किडनी खराब होना क्या है?

आपका  गुर्दा या किडनी आपके शरीर के निचे के  अंगों की एक जोड़ी है। वे आपके खून  को छानते हैं तथा  आप के बॉडी  से  विषैले  पदार्थों को निकालते हैं।

किडनी आप के मूत्र में विषैले चीज़ो को भेजती है तथा जिसे पेशाब के दौरान उन विषैले चीज़ो को आप के शरीर से इस प्रक्रिया के दौरान निकाल दिया जाता है |

किडनी खराब या फेल  तब होता   है जब आपका किडनी आपके खून से विषैले  प्रदार्थ  को पुरे तरीके से साफ करने की ताकत ख़त्म हो जाती है इसके कई कारण है जो  आपके किडनी के हेल्थ  और कार्य में हस्तक्षेप कर सकते हैं, जैसे:  

  • पर्यावरण के  प्रदूषण के कारण  या कुछ दवाओं के  विषाक्त संपर्क से
  • कुछ तीव्र और पुरानी बीमारियाँ से
  • पानी की कमी से
  • किडनी पर चोट लगने से

यदि आपका किडनी  अपना नियमित काम नहीं कर सकता है तो आपकी बॉडी विषैले चीज़ो से भर जाएँगी । इससे किडनी खराब होती  है, जिसका इलाज सही से न होने पर आपके जीवन पर खतरा हो सकती है।

किडनी खराब होने के क्या संकेत है
किडनी खराब होने के क्या संकेत है

किडनी खराब होने के क्या संकेत है

आमतौर पर खराब किडनी वाले किसी आदमी में कुछ संकेत दिखाई देते है जो उसके शरीर में होते है । कभी-कभी कोई लक्षण मौजूद नहीं होते हैं। संभावित लक्षणों में शामिल हैं:

  • मूत्र की कम मात्रा होना
  • पानी की बर्बादी को कम  करने के लिए किडनी  की विफलता के कारण होने वाले तरल पदार्थों के प्रतिधारण से आपके  पैरों की सूजन होना
  • सांस लेने में दिक्कत बिना किसी वजह के
  • अत्यधिक नीद आना या भारपन
  • मतली या उलटी
  • हमेशा उलझन में  होना
  • सीने में दर्द या दबाव होना
  • अचानक बीमार पड़ जाना
  • पकोमा

किडनी खराब होने के प्रारंभिक संकेत

प्रथम  चरण के किडनी  की प्रॉब्लम  इंगित करना कठिन  हो सकता है। वे अक्सर सूक्ष्म और पहचानने में मुश्किल  होते हैं। यदि आप अपने  किडनी में कोई दिक्कत अनुभव करते हैं, तो वे शामिल हो सकते हैं:

  • मूत्र उत्पादन में कमी
  • तरल प्रदार्थ को शरीर बनाय रखने के लिए अंगों में सूजन की आ जाता है
  • साँसों का फूलना

किडनी खराब होने के संकेत

किडनी का खराब होना कई कारणों या कुछ विशेष वजहों से  हो सकता है। आमतौर पर इसका कारण किडनी के खराब होने के प्रकार को भी निर्धारित करता है।

उन लोगो में इसका सबसे ज्यादा खतरा होता है जिनमे ये कुछ प्रमुख संकेत दिखाई देते है

किडनी में रक्त के प्रवाह का कम होना

आपके किडनी  में अचानक से खून की कमी  किडनी  खराब होने का संकेत दे सकती है। खून के प्रवाह को किडनी में कम करने वाली कुछ स्थितियों में शामिल हैं:

  • स्ट्रोक
  • दिल का फेल होना
  • जिगर या जिगर की विफलता के निशान
  • पानी की गंभीर कमी
  • एक गंभीर जलन
  • एक एलर्जी प्रतिक्रिया
  • एक गंभीर संक्रमण, जैसे कि सेप्सिस
  • उच्च रक्तचाप और विरोधी भड़काऊ दवाएं भी रक्त के प्रवाह को सीमित कर सकती हैं।

मूत्र को त्यागने में होने वाली प्रॉब्लम

जब आप का बॉडी  मूत्र को सही तरीके से त्याग  नहीं कर सकते है, तो विषैले चीज़े  किडनी में जमा होने लगते है  और किडनी पर बहुत जोर डालते  हैं। कुछ कैंसर तो पेशाब करने वाले रास्ते को भी बाधित  कर सकते हैं  जैसे

  • ग्रीवा
  • प्रोस्टेट (पुरुषों में सबसे आम प्रकार)
  • कोलन
  • मूत्राशय

अन्य स्थितियों में पेशाब में बाधा हो सकती है और दुर्भाग्य वश गुर्दे की विफलता हो सकती है, कुछ संकेत जिसमे हैं:

  • बढ़ा हुआ  प्रोस्टेट
  • पेशाब के रस्ते में खून के धक्के बनाना
  • नसों को नुकसान जो  मूत्राशय को नियंत्रित करता हो
  • पथरी
किडनी खराब होने के क्या संकेत है
किडनी खराब होने के क्या संकेत है

किडनी के खराब होने का परीक्षण

ऐसे कई परीक्षण हैं जिनका उपयोग आपका डॉक्टर किडनी  की विफलता के इलाज  के लिए कर सकता है।

मूत्रविश्लेषण

आपका डॉक्टर किसी भी दोष  के लिए ,परीक्षण करने के लिए मूत्र का नमूना ले सकता है, जिसमें असामान्य प्रोटीन या चीनी शामिल है जो मूत्र में मिला होता  है।

वे एक मूत्र सेडीमेंट  परीक्षा भी कर सकते हैं। यह परीक्षण लाल और सफेद रक्त कोशिकाओं की मात्रा को मापता है, बैक्टीरिया के उच्च स्तर की तलाश करता है, और ट्यूब आकार के कणों की उच्च संख्या की खोज करता है, जिन्हें सेलुलर कोशिका कहा जाता है।

खून के नमूने की जाँच

आपका डॉक्टर आपके किडनी  द्वारा फ़िल्टर किए गए पदार्थों को मापने के लिए रक्त परीक्षण का आदेश दे सकता है, जैसे कि रक्त यूरिया नाइट्रोजन (बीयूएन)(blood urea nitrogen (BUN)) और क्रिएटिनिन (सीआर)। इन स्तरों में तेजी से वृद्धि तीव्र गुर्दे की विफलता का संकेत दे सकती है।

इमेजिंग

अल्ट्रासाउंड, एमआरआई और सीटी स्कैन जैसे परीक्षण किडनी  की छवियों के साथ-साथ मूत्र पथ को भी प्रदान करते हैं। यह आपके डॉक्टर को आपके गुर्दे में रुकावट या असामान्यताएं देखने की अनुमति देता है।

उम्मीद है दोस्तों आपको यह पोस्ट पसंद आया होगा, और आपको किडनी खराब होने के संकेत के बारे में पता चल गया होगा| यदि आपको कोई और परेशानी है तो नीचे कमेंट करके ज़रूर पूछे| हम आपकी सहायता करने के लिए तैयार है|

धन्यवाद

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घमौरियां क्या होती है और घमौरियो का रामबाण इलाज क्या है?

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घमौरियों का रामबाण इलाज
घमौरियों का रामबाण इलाज

नमस्कार दोस्तों यहां पर हम जानेंगे कि घमौरिया क्या होता है और घमौरियों का रामबाण इलाज क्या है?

हीट रैश या घमौरियां परिभाषा और तथ्य – heet raish ya ghamori kya hai

हीट रैश या घमौरियां तब होता है जब त्वचा की पसीने की ग्रंथियां धूल व पसीने के कारण बंद हो जाती हैं और उत्पादित पसीना त्वचा की सतह बाहर नहीं निकल पाता है। यह सूजन का कारण बनता है जिसके परिणामस्वरूप दाने होते हैं।

हीट रैश या घमौरियां के सामान्य लक्षणों में त्वचा पर लाल धक्कों का होना, और त्वचा के लिए एक चुभन या खुजली महसूस होना (जिसे कांटेदार गर्मी भी कहा जाता है)।

दाने छोटे छाले के साथ लाल त्वचा के रूप में प्रकट होता है और सूजन के साथ दिखाई देते है। यह अक्सर त्वचा के छिद्रों या तंग कपड़ों के जगह में होता है जहां हवा सही से जा नहीं पाती है।

जब त्वचा को ठंडा होने दिया जाता है तो हीट रैश या घमौरियां आमतौर पर काम होने लग जाते हैं। यदि घमौरियां पुरे शरीर पर फ़ैल गयी हो तो जल्द से जल्द अपने नजदीकी डॉक्टर से इलाज के लिए संपर्क करे |

हीट रैश या घमौरियां को गर्म व ऊमष वाली जगहों से बचकर, फिटिंग के ढीले कपड़े पहन कर और एयर कंडीशनिंग या कूलर का उपयोग करके हवा को अच्छे से पुरे शरीर पर फैला कर बढ़ने से रोका जा सकता है।

हीट रैश या घमौरियां क्या है? – heet raish ya ghamori kya hai

त्वचा का काम शरीर के अंदरूनी भाग को बाहरी दुनिया से बचाना है। यह घुसपैठियों जैसे जीवाणु ,विषाणु ,बैक्टीरिया आदि के खिलाफ एक निवारक बाधा के रूप में कार्य करता है जो संक्रमण, रसायन, या पराबैंगनी प्रकाश को शरीर पर हमला करने या नुकसान पहुंचाने का कारण बनता है। पसीना शरीर के तापमान नियंत्रण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक तरीका जो शरीर को ठंडा करता है वह पसीने के द्वारा होता है, और उस पसीने या पसीने को वाष्प को बहार के वातावरण में जाने देता है। पसीने का निर्माण पसीने की ग्रंथियों में होता है जो पूरे शरीर में लाइन से होती हैं (केवल कुछ छोटे जगहों को छोड़कर जैसे कि नाखूनों, पैर के नाखुनो और कान में छोड़कर)।

पसीने की ग्रंथियां त्वचा की डर्मिस लेयर या गहरी परत में स्थित होती हैं, और मस्तिष्क में तापमान नियंत्रण केंद्रों द्वारा नियंत्रित होती हैं। ग्रंथि से पसीना एक नाली द्वारा त्वचा की सतह तक पहुंच जाता है।

एक हीट रैश या घमौरिया तब होता है जब पसीने की नलिकाएं बंद हो जाती हैं और पसीना त्वचा की सतह तक नहीं पहुंच पाता। इसके बजाय, यह त्वचा की सतह के नीचे फंस जाता है जिससे हल्की सूजन या दाने हो जाते हैं।

घमौरिया को प्रिकली हीट या मोनिएरिया भी कहा जाता है।

हीट रैश या घमौरियां के क्या कारण हैं? – heet raish ya ghamori ke kya karn hai

यह अनिश्चित है कि क्यों कुछ लोगों को घमौरिया मिलते हैं और अन्य को नहीं।

यदि अत्यधिक पसीना आता है, तो पसीने की ग्रंथि नलिकाएं बाधित हो सकती हैं, और उस पसीने को किसी विशिष्ट जगह से वाष्पित नहीं होने दिया जा सकता है। कैसे रुकावट हो सकती है, इसके कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:

  • गर्दन, बगल, या कमर जैसी त्वचा में सिकुड़न बगल की त्वचा को छूती हैं, जिससे हवा का प्रवाह मुश्किल हो जाता है और पसीने की वाष्पीकरण को रोकता है।
               
  • चुस्त कपड़े जो पसीने के वाष्पीकरण को रोकता है।
               
  • भारी कपड़ों या चादरों में खुद को लपेटना।  यह तब हो सकता है जब कोई व्यक्ति सर्दी में गर्म रखने की कोशिश करता है या जब बीमारी के कारण ठंड लग जाती          है।
               
  • भारी क्रीम या लोशन पसीने की नलिकाओं को रोक सकते हैं।

शिशुओं में पसीने की ग्रंथियाँ अविकसित होती हैं, जो उनके द्वारा उत्पादित पसीने को सही से निकालने में सक्षम नहीं होती हैं। वे घमौरिया को विकसित कर सकते हैं यदि वे गर्म मौसम के संपर्क में आते है | घमौरिया कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट के रूप में हो सकता है (उदाहरण के लिए क्लोनिडीन [कैटाप्रेस])।

हीट रैश या घमौरिया से कौन से जोखिम है? – heet raish ya ghamori se kaun se jokhim hai

घमौरिया का दिखना इस बात पर निर्भर करता है कि त्वचा में अतिरिक्त पसीना कहां हो रहा है।

गर्म, नम, जलवायु वाले स्थानों पर घमौरिया अधिक होते हैं क्योंकि लोगों को पसीना अधिक आता है।

क्लासिक हीट रैश या घमौरिया तब होता है जब पसीना एपिडर्मिस की गहरी परतों में सूजन का कारण बनता है।

बहुत सारे पसीने से जुड़े गहन व्यायाम से घमौरिया हो सकता है, खासकर अगर पहने हुए कपड़े पर्याप्त वायु संचार की अनुमति नहीं देते हैं।

घमौरियों का रामबाण इलाज
घमौरियों का रामबाण इलाज

घमौरियों का रामबाण इलाज – ghamori ka ramban ilaj

यदि दोस्तों आपको घमोरियां हो गई है, तो आप बर्फ का इस्तेमाल करके अपनी घमौरियों को सही कर सकते हैं| इसके लिए आपको किसी प्लास्टिक या कपड़े में कुछ बर्फ के टुकड़ों को लपेटना है और फिर उसे अपने घमोरियां वाली जगह पर लगाना है| याद रखें बर्फ को सीधे अपनी त्वचा से संपर्क लाने के बजाय उसे किसी कपड़े में लपेटकर प्रयोग करें|

यदि आपको घमोरियां हो गई है, तो आप मुल्तानी मिट्टी का प्रयोग भी कर सकते हैं| मुल्तानी मिट्टी एक घरेलू नुस्खे के लिए बहुत ही अच्छा औषधि है| नहाने से 10 मिनट पहले मुल्तानी मिट्टी का लेप अपने घमौरी वाले जगह पर लगा ले, हो सके तो मुल्तानी मिट्टी में थोड़ा सा गुलाब जल भी मिला दे|

घमौरियों को दूर करने के लिए आप एलोवेरा का भी प्रयोग कर सकते हैं जिस प्रकार मुल्तानी मिट्टी को लगाने से पूर्व लगाना था, उसी प्रकार एलोवेरा को भी नहाने के कुछ समय पूर्व अपने घमौरियों वाले जगह पर लगा ले| यह आपको बहुत ही जल्दी आराम देगा|

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